गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
नारे, प्रतिरोध और मज़ा-मज़ाक
फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा
पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय