गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
माहवारी का ब्योरा नौकरी के लिए क्यों जरूरी (?) : बेड़ियां तोडती स्त्री: नीरा माथुर
मातृत्व अवकाश पर भी अंकुश! (बेड़ियाँ तोड़ती स्त्री: जे. शर्मिला)
अपने परिवार के खिलाफ लड़कर लता सिंह ने हासिल किया न्याय: बेड़ियाँ तोडती स्त्री
और भी तरीके हैं (तीन) तलाक-ए-बिद्दत समाप्त करने के: सरकार बहादुर की मंशा पर शक
बेड़ियाँ तोड़ती स्त्री: करुणा प्रीति: अनब्याही माँ का संतान के संरक्षकत्व का संघर्ष
बेड़ियाँ तोड़ती स्त्री : मेरी रॉय, जिसने सम्पत्ति में समान उत्तराधिकार की लड़ाई लड़ी
पैतृक सम्पत्ति, कृषि भूमि और स्त्रियाँ
इंसाफ करने के नाटक-नौटंकी की क्या जरूरत: अरविंद जैन
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय