गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
सत्ता में भारतीय महिलाओं की उपस्थिति: सामर्थ्य, सीमाएँ एवं संभावनाएँ
कानूनी भेदभाव: बेड़ियाँ तोड़ती स्त्री (सी.बी.मुथम्मा)
हिंदू कोड बिल और डॉ. अंबेडकर
अपने ही कानूनी जाल-जंजाल में फंसे पितृसत्ता के होनहार लाडले
भेदभाव की कानूनी बेड़ियाँ तोड़ती स्त्री: रख्माबाई
न्यायपालिका में यौन शोषण का मामला पहला नहीं है और न्याय नहीं हुआ तो आख़िरी भी नहीं होगा
यौन-उत्पीड़न की जांच आरोपी मुख्य न्यायाधीश ही कैसे कर सकते हैं!
धारा 377 की मौत और पितृसत्तात्मक विमर्श पद्धति
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय