गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
मालिनी अवस्थी से बातचीत
स्त्री संवेदना का नाटक गबरघिचोर
रतन थियाम का रंगकर्म : कला की विभिन्न विधाओं की समेकित अभिव्यक्तियों के समुच्चय का प्रदर्शन”
अठारह साल का हुआ भारत रंग महोत्सव
उम्र भर इक मुलाक़ात चली जाती है
ब्राह्मणवाद ने की बाजीराव-मस्तानी की हत्या
ताकि बोलें वे भी, जो हैं सदियों से चुप
परिवर्तनगामी चेतनाकी संवाहक प्रस्तुति… ‘सपने हर किसी को नहीं आते’
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय