गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
वासना नाजायज नहीं होती: लिपिस्टिक अंडर बुर्का बनाम बुर्के का सच
सावधान ! यहाँ बुर्के में लिपस्टिक भी है और जन्नत के लिप्स का आनंद लेती उषा की अधेड़ जवानी भी
लिपस्टिक अंडर माय बुर्का : क़त्ल किए गए सपनों का एक झरोखा
पांच रूपये और पांच मिनट का क्रूर फेयर और लवली व्यापार
सामंती हवेलियों में दफ्न होती स्त्री
मोदी, केजरी को महिला कलाकार की ललकार: जान देंगे लेकिन जगह नहीं छोड़ेंगे !
युवाओं के गायक संभाजी समाज बदलने के गीत गाते हैं
अस्तित्व के प्रश्न खड़े करती दलित स्त्री पात्र
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय