आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
वर्जिनिटी का नहीं है सवाल … सवाल ना का है . !
जाघों से परे ‘पार्च्ड’ की कहानी: योनि नहीं है रे नारी, वह भी मानवी प्रतिष्ठित
पिंक के बहाने ‘अच्छी औरतें’ और ‘बुरी औरतें’
नये हिंदी सिनेमा में नयी स्त्री
द्रौपदी ! भारतीय सेना बलात्कारी नहीं,राष्ट्रवादी है (?!)
‘पिंक’एक आज़ाद-ख्याल औरत की नज़र से
मी लार्ड, स्त्रीवाद का रंग ‘पिंक’ है ! कुछ-कुछ (?) लाल और नीला भी
‘पार्च्ड’ के जवाब , ‘पिंक’ से कुछ सवाल : स्त्रीवाद के आईने में (!)
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर