पुस्तक अंश – अनुदित और मूल कविता
आज इज़रायली कवि आज येहूदा अमिचाई की कविता
बम का व्यास {अनुदित }

येहूदा अमिचाई (Yehuda Amichai) का जन्म 3 मई, 1924 को जर्मनी के Wurzburg में हुआ था। वह इज़रायल की महत्त्वपूर्ण कवयित्रियों में से एक हैं। उनकी कविताओं का अनुवाद 40 से अधिक भाषाओं में हो चुका है। उन्हें ‘श्लोन्सकी पुरस्कार’ (1937), ‘ब्रेनर पुरस्कार’ (1969) समेत कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। 22 सितम्बर, 2000 में उनका देहान्त हुआ।
“बम का व्यास”
बम का व्यास बम का व्यास तीस सेंटीमीटर था और
उसके प्रभाव के क्षेत्र का व्यास
लगभग सात मीटर
चार मरे और ग्यारह घायल
और इनके दर्द और समय का घेरा
दूर तक फैला है जिसमें उजड़े
दो अस्पताल और एक कब्रिस्तान हैं
सौ किलोमीटर से अधिक की दूरी से आई
वो जवान औरत जिस शहर से आई थी
वहीं दफनाई गई
इस तरह घेरा और भी बड़ा हो जाता है
और एक तन्हा आदमी
दूर किसी देश के समुद्री तट पर
उस औरत के लिए शोक मनाता
इस घेरे को और भी विस्तार देता
है घेरे में पूरा का पूरा विश्व समा जाता है
और मैं जिक्र नहीं करूँगा उन
अनाथों के विलाप का
जो भगवान आस्था में डूबा है
उससे परे एक ऐसा घेरा बनता है जिसका
न कोई अन्त है और न ही कोई ईश्वर !
नासिरा शर्मा की मूल कविता
प्यार करो
[फ़िलिस्तीन के बच्चों के नाम]
प्यार करो बस प्यार
प्यार करो हर बच्चे को बारम्बार, प्यार करो
बच्चा आपका हो या गैर का
बस प्यार करो
बेतहाशा प्यार करो
यह अहसास दिया है फ़िलिस्तीन व इजरायल युद्ध ने
जिस समय में हम साँस ले रहे हैं
वह कभी भी सुलग सकता है सूखे पत्तों की तरह
बेगुनाह बच्चे, मासूम बच्चे नहीं जानते सियासत
न जानते हैं कि कौन बरसा रहा है बम उन पर
जब मुर्दा बच्चों के बीच घायल बच्चा ज़ख़्मों से चूर
भूख और प्यास से मजबूर, पुकार उठता है माँ।
तो माँ की मीठी आवाज़ ‘आई’ की जगह
उठा लेते हैं दो अजनबी हाथ, पुचकारते हैं, पोछते हैं
चेहरे से बारूदी धूल को, जख्मों पर लगाते हैं दवाएँ!
फिर बाँध देते हैं उन्हें सफेद कपड़ों में
इसीलिए
कहती हूँ प्यार करो बेतहाशा प्यार करो
उसके माथे और गालों पर
बस प्यार करो, बस प्यार!
