नारे, प्रतिरोध और मज़ा-मज़ाक
आधुनिक भारत में महिलाओं की भूमिका : परिवर्तन, उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ
बाबू जगदेव प्रसाद की राजनीति: भाषा, प्रतीक और मुद्दे
शिवम् अवस्थी की कविताएँ और ग़ज़ल
अपने ही घर में खतरों से घिरी बेटियां
औरत ’चुप‘ रहे, तभी ’महान‘ है
स्त्री के प्रेम की अभिव्यक्ति – ‘अन्या से अनन्या’
‘डार्क रूम में बंद आदमी’ की निगाह में औरत : आखिरी क़िस्त
‘डार्क रूम में बंद आदमी’ की निगाह में औरत : पहली क़िस्त
मजदूर-वर्ग के दृष्टिकोण से स्त्री-मुक्ति : १५-१६ नवम्बर,२०१४, गाँधी- आश्रम , सेवाग्राम, में दो दिन का कार्यशाला
धर्म की खोखली बुनियादों में दबी स्त्री
महज मुद्दा
‘द सेकंड सोच’: कटी हुई जुबानों के बीच सच का परचम