लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
महिलाएं असुरक्षित, यहां भी और वहां भी
चाहे नरक में दीजो डार
सलाखें भीतर और बाहर
दिल्ली में नाइजीरियन यौन- दासियाँ
पश्चिम उत्तर प्रदेश : स्त्री की नियति
हरियाणा की मनीपुरी बहुएं
विमर्श से परे: स्त्री और पुरुष-आख़िरी क़िस्त
यह चुप्पी खतरनाक है
सूखा नशा