लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
यौनिकता की विश्वसनीय दृश्यता
दाम्पत्य में ‘बलात्कार का लाइसेंस’ असंवैधानिक है
फैंसी स्त्रीवादी आयोजनों में जाति मुद्दों की उपेक्षा
मनुवादी न्याय का शीर्ष तंत्र
दिमाग पर निष्क्रिय होने की चोट उसे निष्क्रिय बनाकर ही छोड्ती है
पितृसत्तात्मक समाज का शिकार पुरुष तथा स्त्रीवादी मुक्ति अभियान
न्यायपालिका में मौजूद जातिवादी मानसिकता – अरविंद जैन
सूखा नशा