लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
रेहाना का अंतिम पत्र
मंदिर में उन्हें ऊपरी वस्त्र खोलकर ही जाना होता था , देना होता था स्तन टैक्स
राजेन्द्र यादव की स्वीकरोक्ति और स्त्रीवादी प्रतिबद्धता के सवाल !
‘मर्द’ तैयार करती सोच की पहली सीख : उलटबांसियां: उलटी दुनिया की पाठशाला (1998)
स्वप्न भी एक शुरुआत है
कम से कम एक दरवाज़ा
मलाला की कहानी बी बी सी के जुबानी
एक क्रांतिकारी की पत्नी का आत्मकथ्य
सूखा नशा