लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
मनुस्मृति दहन के आधार : डा आम्बेडकर
इस दुनिया को जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिए
वेश्यावृत्ति को कानूनी बनाना समस्या का समाधान नहीं : महिला संगठन
वे कुन्तियाँ नहीं गौरव से भरी माँ हैं
अपने ही घर में खतरों से घिरी बेटियां
औरत ’चुप‘ रहे, तभी ’महान‘ है
धर्म की खोखली बुनियादों में दबी स्त्री
बिहार के भागलपुर में बलात्कार की कोशिश : जेंडर और जाति के समुच्चय का घिनौना चेहरा
सूखा नशा