आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
जेएनयू बलात्कार और वामपंथ का अवसरवाद
मेरा शबाब भी लौटा दो मेरे मेहर के साथ
यहाँ सेक्स बिकता है, सेक्स क़त्ल करता है: बदनाम नहीं, ये मर्दों की गलियाँ हैं
आरक्षण के भीतर आरक्षण के पक्ष में बसपा का वाक् आउट : नौवीं क़िस्त
आरक्षण के भीतर आरक्षण : क्यों नहीं सुनी गई आवाजें : छठी क़िस्त
बलात्कार-बलात्कार में फर्क होता है साहेब !
महिला संगठनों, आंदोलनों ने महिला आरक्षण बिल को ज़िंदा रखा है : वृंदा कारत: पांचवी क़िस्त
शुभम श्री की पुरस्कृत और अन्य कविताएं : स्त्रीकाल व्हाट्सअप ग्रूप की टिप्पणियाँ
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर