लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
मातृवंशात्मक समाज में स्त्री
रूपाली सिन्हा की कविताएं
एक बार फिर नाचो न इज़ाडोरा
असीमा भट्ट की कविताएँ
उग्रतारा: प्रेम-क्षेत्र में वैध -अवैध की निरर्थकता
जेंडर और पितृसत्ता पर क्रांतिकारी आंदोलन के नजरिए की एक आलोचना
लूसर
ताकि बोलें वे भी, जो हैं सदियों से चुप
सूखा नशा