ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय
हिंदू कोड बिल से नारी शक्ति वंदन अधिनियम तक
रिपब्लिकन एकजुटता और युवा शक्ति को साथ लेकर लोकतंत्र को मजबूत करने का संकल्प हो
वंदना वाजपेयी की कहानियाँ : नई संवेदनाओं की कथा-यात्रा
एक खुली क़िताब जिसे पढ़ना बाकी है
मीरा का काव्य और स्त्री अस्मिता का प्रश्न
आलोक आज़ाद की ‘ईश्वर के बच्चे’ और अन्य कविताएं
‘कुतों के रूपक’ में इंसानियत का प्रतिबिम्ब
गुंजन उपाध्याय पाठक की पाँच कविताएँ
प्रश्नचिह्न
जगजीवनराम के बारे में कई भ्रांतियां तोड़ती है यह किताब
‘बड़े घर की बेटी’ क्लाइमेक्स का पुनर्लेखन
नारे, प्रतिरोध और मज़ा-मज़ाक