ग्रामीण बिहार में “सूखा नशा” का बढ़ता जाल: 10 वर्षों से उभरता एक सामाजिक आपदा
होना चाहती हूं मूक इतिहास की बोली: बापू टावर (पटना) में मुखरित हुआ स्त्री स्वर
हंस ब्राह्मणवाद के यम ही नहीं,डाइवर्सिटी आंदोलन के स्तम्भ भी रहे!
“धरती भर आकाश” में स्त्री शिक्षा और आर्थिक स्वतंत्रता का प्रतिरोध
‘बड़े घर की बेटी’ क्लाइमेक्स का पुनर्लेखन
ईना, मीना के बहाने “अकिला फुआ”
उम्मीदों के आतिशदाने
दलित कहानियों में संवेदनात्मक पक्ष, परिवर्तन और दिशा
अस्सी प्रतिशत स्त्रियों की कथा
पीढ़ा घिसता है तो पीढ़ी बनती है
ज़ैतून के साये
मदर इंडिया: एक संघर्षरत भारतीय स्त्री की अमर कथा
स्त्री सुन्दरता के नये पैमाने : आत्ममुग्धता से आत्मकुंठा तक