लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
स्त्री-सत्ता : यथार्थ या विभ्रम
स्त्री रचनाधर्मिता के तीन स्वर
जब जरा गरदन झुका ली देख ली तस्वीरें यार
स्त्री रचनाधर्मिता की दो पीढियां .
डॉ. अम्बेडकर का मूल चिंतन है स्त्री चिंतन
पत्रों में झांकता बच्चन का व्यक्तित्व
दलित स्त्री आंदोलन तथा साहित्य- अस्मितावाद से आगे
सावित्रीबाई फुले : शैक्षिक –सामाजिक क्रान्ति की अगुआ
सूखा नशा