लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
भाषा बहता नीर
औरतें : अंतिम किस्त
यहाँ झील और ज्यादा गहरी और शांत हो गयी
शंखमुखी शिखरों का कवि : लीलाधर जगूड़ी
ज़िंदा जलती होलिका
कविता कृष्णपल्लवी की कविताएँ
युग नायिका सावित्री बाई फुले
आवाज़ और अन्य कविताएं
सूखा नशा