लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
गीता मलिक की कविताएँ
पुस्तक समीक्षा: जिरहुल-जसिंता केरकेट्टा
‘सेलिब्रिटी’ बनावटी जीवन और घरेलू अंधेरों के संघर्ष की कहानी
प्रियदर्शन की कहानी “न्यू नॉर्मल” की समीक्षा
अनामिका की कहानियाँ अन्याय के धरातल को तोड़ती हैं
संबंधों के सैलाब की त्रासदी: कहानी संग्रह ‘एक और सैलाब’ मेहरुन्निसा परवेज़ (2)
नई माँ
अपनी पहचान
सूखा नशा