फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा
पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
घोंसला (स्वाति श्वेता) की कहानी
“ये निंदा प्रस्ताव नहीं है”
आलोक धन्वा, ध्रुव गुप्त, निवेदिता समेत अधिकांश साहित्यकारों ने किया ‘बिहार संवादी’ (दैनिक जागरण द्वारा आयोजित) का बहिष्कार
दिल्ली के कार्यक्रम से भी लेखकों ने किया किनारा: दैनिक जागरण का व्यापक विरोध
दैनिक जागरण द्वारा आयोजित ‘बिहार संवादी ‘ का साहित्यकार करेंगे बहिष्कार (!)
सन् 1992 को याद करते हुए
दलित स्त्रीवाद अंतरजातीय विवाह को सामाजिक बदलाव का अस्त्र मानता है -रजनी तिलक
भाषा में भय के मनोविशेषज्ञ हैं मलखान सिंह
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन