स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
उनकी प्रतिबद्धता हाशिये के लोगों के साथ ताउम्र रही
एक विदुषी पतिता की आत्मकथा: दूसरी क़िस्त
वह आत्मीय और दृष्टिसंपन्न संपादक हमें अलविदा कह गयी
महादेवी-काव्य-संध्या का आयोजन:महादेवी वर्मा के गीतों का गायन और समकालीनों का काव्यपाठ
एक विदुषी पतिता की आत्मकथा
समकालीन महिला लेखन को संबोधित संगोष्ठी
नाक की फुरूहुरी: सोनी पांडेय कहानी
‘दीवार में एक खिड़की रहती थी’ उपन्यास में प्रकृति चित्रण
‘गूज बम्प्स’