स्वर की बहुरंगी विरासत और स्त्री-अभिव्यक्ति की स्वतंत्र आवाज़
एनडीए के राज में सुरक्षित नहीं हैं महिलाएं
‘रजत रानी मीनू’ की कविताओं में स्त्री – रुपक कुमार
नीतिशा खलखो की कविताएं
भारतेन्दु हरिश्चंद्र की पत्रकारिता और स्त्री-मुक्ति के प्रश्न
‘लिखो इसलिए’ व श्रीदेवी की अन्य कविताएं
मैं अमर बेल को गाली नहीं देता और अन्य कविताएं (कवि:एस एस पंवार)
“केदारनाथ सिंह की कविताओं में स्त्री”
औरतें अपने दु:ख की विरासत किसको देंगी
पंखुरी सिन्हा की कविताएं (घास पटाने के मेरे बूट व अन्य)
कविता की प्रकृति ही है समय से आगे चलना
आबिदा (परिमला अम्बेकर की कहानी)
‘गूज बम्प्स’