रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
मर्दाना हकों की हिफ़ाजत करता मुस्लिम पर्सनल ला बोर्ड
मेरा शबाब भी लौटा दो मेरे मेहर के साथ
मुख्यमंत्री जी शराबबंदी से महिला उत्पीडन बंद नहीं होता: महिला छात्र नेता का पत्र नीतीश कुमार के नाम
‘राष्ट्रहित और आरक्षण’
कितनी स्त्रीवादी होती हैं विवाहेत्तर संबंधों पर टिप्पणियाँ और सोच (!)
बलात्कार-बलात्कार में फर्क होता है साहेब !
धार्मिक औरतें या गुलाम औरतें ….!
मुसलमान भी नहीं पैदा करना चाहते बेटियां
नाच एक संवेदनशील उपन्यास