दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
स्त्रीवाद की ` रिले रेस `में रमणिका गुप्ता का बेटन
स्त्रीकाल द्विमासिक ई जर्नल (शोध), अंक 27-28 ( दिसम्बर मार्च )
दुश्मनी से परे जन की बात: पाकिस्तानी जनांदोलन की किताब
स्त्रीत्व, देहबोध और आत्मानुभूति : सामाजिक निषेध से आध्यात्मिक स्वायत्तता तक
महिलाओं को संसद में होना ही चाहिए : वेंकैया नायडू
“आम औरत की दैहिक या मानसिक यातना के लिए दहकते सवाल“
स्त्रीकाल (अक्टूबर-दिसंबर) पढ़ें नॉटनल पर
स्त्रीकाल द्विमासिक ई जर्नल (शोध), अंक 26 (अक्टूबर -नवंबर, 2017)
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना