रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
कानूनी भेदभाव: बेड़ियाँ तोड़ती स्त्री (सी.बी.मुथम्मा)
हिंदू कोड बिल और डॉ. अंबेडकर
अपने ही कानूनी जाल-जंजाल में फंसे पितृसत्ता के होनहार लाडले
भेदभाव की कानूनी बेड़ियाँ तोड़ती स्त्री: रख्माबाई
न्यायपालिका में यौन शोषण का मामला पहला नहीं है और न्याय नहीं हुआ तो आख़िरी भी नहीं होगा
यौन-उत्पीड़न की जांच आरोपी मुख्य न्यायाधीश ही कैसे कर सकते हैं!
धारा 377 की मौत और पितृसत्तात्मक विमर्श पद्धति
यौन स्वतंत्रता, कानून और नैतिकता (अरविन्द जैन)
नाच एक संवेदनशील उपन्यास