रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
न्याय व्यवस्था में दहेज़ का नासूर
दहेज विरोधी कानून में सुधार की शुरुआत
हम चार दशक पीछे चले गए हैं :
दाम्पत्य में ‘बलात्कार का लाइसेंस’ असंवैधानिक है
मनुवादी न्याय का शीर्ष तंत्र
न्यायपालिका में मौजूद जातिवादी मानसिकता – अरविंद जैन
नाच एक संवेदनशील उपन्यास