दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
अठारह साल का हुआ भारत रंग महोत्सव
उम्र भर इक मुलाक़ात चली जाती है
ब्राह्मणवाद ने की बाजीराव-मस्तानी की हत्या
ताकि बोलें वे भी, जो हैं सदियों से चुप
परिवर्तनगामी चेतनाकी संवाहक प्रस्तुति… ‘सपने हर किसी को नहीं आते’
भिखारी की विरासत की गायिका
रंग रेखाओं में ढली कविता
मंच पर स्त्री
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना