रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
आये तुम इस धरती पर बहुजन हिताय, बहुजन सुखाय !
बहस में डाक्यूमेंट्री
स्त्री के रंगों की दुनिया
कला, धर्म, बाजार और स्त्री का द्वंद्व है रंग रसिया
प्रतिरोध का सिनेमा उत्सव भी है ,और आंदोलन भी
जोहरा आपा तुम्हें लाल सलाम!
सांस्कृतिक ढकोसलों पर कुठाराघात करती फिल्म : ‘ क्वीन ‘
नाच एक संवेदनशील उपन्यास