दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
सत्यजीत राय के वाजिद अली शाह
हिंदी सिनेमा में बाबा साहेब अम्बेडकर की वैचारिकी
चमकीला का स्याह समाज
कमला: मौत एक क्रमिक आत्म(हत्या)
मदर इंडिया: एक संघर्षरत भारतीय स्त्री की अमर कथा
द केरला स्टोरी – क्या वाकई 10 साल के बाद केरल एक मुस्लिम स्टेट हो जाएगा?
धरती का महारस और प्रेम की आधुनिकता : गुलज़ार के फिल्मी गीतों में लौकिकता, आत्म और असीम का अंतर्संबंध
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना