आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
साहस का सौंदर्यशास्त्र गढ़ती नायिकाएं
सेलेब्रटिंग कैंसर
स्त्रीविमर्श में जाति, वर्ग और धार्मिक पहचान की महत्वपूर्ण भूमिका होनी चाहिए : नमिता सिंह
1990 के बाद का हिंदी समाज और अद्विज हिंदी लेखन
किस हाल में हैं बोधगया भूमि मुक्ति आन्दोलन की जमीन मालकिनें !
नये हिंदी सिनेमा में नयी स्त्री
समग्र क्रांति का स्वप्न: अखिल भारतीय दलित महिला सम्मेलन
प्रेम के स्टीरियोटाइप से मुक्ति ही प्रेम है
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर