गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
महिलाओं की राजनीतिक उपेक्षा : 33% में और कितनी देर
दलित स्त्रियों पर पुलिसिया बर्बरता का नाम है नीतीश सरकार
पितृसत्तात्मक दृष्टिकोण और स्त्री की आजादी विशेष संदर्भ-मैत्रेयी की कहानी “पगला गयी है भागवती”
मेरी ज़िंदगी का सिर्फ़ एक तिहाई हिस्सा ही मेरा है: जयललिता
हिंसा में कोई मर्दानगी नहीं
मुल्क में बड़े जन आंदोलन की जमीन तैयार हो रही है: मेधा पाटेकर
फेसबुक की खिड़की से झांकती ललनायें/असूर्यमपश्यायें
समाज, संसाधन और संविधान बचाने के लिए एकजुट हों – मेधा पाटकर
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय