आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
स्वप्न भी एक शुरुआत है
कम से कम एक दरवाज़ा
मलाला की कहानी बी बी सी के जुबानी
एक क्रांतिकारी की पत्नी का आत्मकथ्य
इतिहास का अंधकूप बनाम बंद गलियों का रूह -चुह : गया में यौनकर्म और यौनकर्मी : अंतिम क़िस्त
स्त्री-शक्ति की भूमिका से उठते कई सवाल
इतिहास का अंधकूप बनाम बंद गलियों का रूह-चुह : गया में यौनकर्म और यौनकर्मी : पहली क़िस्त
हर पुरुष अपनी चमड़ी के भीतर मर्द ही होता है
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर