नाच एक संवेदनशील उपन्यास
राहुल गांधी,कांग्रेस की परंपरा और INDIA गठबंधन का असहज भविष्य
भारतीय राजनीति के आधुनिक दधीचि हैं लालू प्रसाद!
ऑब्जेक्टिव प्रश्न से आत्मबोध तक : बाबासाहेब की खोज
बहन भी तो मेट्रो ले रही होगी इस वक्त
छुई-मुई
जायसी और पद्माकर की नायिकाओं के व्यक्तित्व के सामाजिक पक्ष का तुलनात्मक अध्ययन
सत्ता और विमर्श के अन्तर्सम्बन्धों की रवायत (चित्रा मुद्गल की कहानियों का पुनराकलन)
बिना इजाज़त अन्दर आना मना है
संतोष अर्श की कविताएं : स्त्री
ऑब्जेक्ट से सब्जेक्ट बनने की जद्दोजहद
हिंदी साहित्य से झाँकतीं आदिवासी स्त्रियाँ
कवि कभी मरता नहीं, वह अपनी रचनाओं में जीवित रहता है