गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
पुस्तक समीक्षा: जिरहुल-जसिंता केरकेट्टा
प्रियदर्शन की कहानी “न्यू नॉर्मल” की समीक्षा
कोबाल्ट ब्लू: फ़िल्म समीक्षा
अनामिका की कहानियाँ अन्याय के धरातल को तोड़ती हैं
‘पाक’ की ‘सफाई’ पर प्रार्थना पत्र
‘फेंकने दो उन्हें गोबर’: फुले दम्पति की संघर्ष गाथा
अलविदा “रोज दीदी” (डॉ. रोज केरकेट्टा )
मुस्लिम महिलाओं के अधिकार, इस्लामी कानून, परंपराएँ और सामाजिक सुधार
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय