गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
इंसाफ अधूरा है
जुंको फुरुता: जिसे याद रखना ही होगा
मगध में छठ : स्त्रीवादी पाठ
पहले बाबरी , फिर दादरी , फिर हिन्दुत्व के नाम पर बहादुरी
“मोर्चे पर कवि” / राजा रोज कुरते बदलता है/लेकिन राजा नंगा है
लोकआस्था और श्रमण परम्परा की अदम्य जिजीविषा का आख्यान
सुनपेड़ हत्या कांड : तथ्य और प्रतिबद्धता
औरत , विज्ञापन और बाजार
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय