गद्य काव्य रचना त्रयी
फूलमती का वसंत ऋतु
‘कामायनी’ और ‘उर्वशी’ : आधुनिक मनुष्य की त्रासदी और मुक्ति-चेतना का आख्यान
बापू टावर में सवर्ण वर्चस्व का नंगा नाच
मीरा को ब्राह्मण सिद्ध करने वालों के पुरखों ने कबीर को भी बनाया था ब्राह्मण
जाति, जेंडर, राजनीति और दलित मुक्ति का प्रश्न: कोविंद बनाम कुमार
वायरल हुई योग और मोदी का मजाक उड़ाती यह कविता
बहुजन चौपाल में हुई चर्चा: भारत का भगवाकरण और सामाजिक न्याय की चुनौतियां
राजेन्द्र यादव को मैत्रेयी द्वारा अपंग कहने से आहत साहित्यकार: पहले भी लिखी थी पंकज बिष्ट को चिट्ठी
साहित्यिक मतदाता की खुली चिट्ठी : केजरीवाल सर, लिखवायें किताब की कुंजी ‘सफरनामा कितना सच, कितना झूठ.’
मैत्रेयी इतनी इर्ष्यालू थी कि वह नजर रखती थी कि राजेंद्र जी के पास कौन आ रहा है (?)
‘ग्लोबल बहुजन एवार्ड’से सम्मानित हुईं मनीषा बांगर
लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई