“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना
त्योहारों के बहुजन सन्दर्भ
धरती ( भूदेवी ) जहाँ होती हैं रजस्वला !
इस दुनिया को जितनी जल्दी हो बदल देना चाहिए
भाजपा सरकार से अपील : फॉरवर्ड प्रेस पर पुलिस कार्यवाई और उसके संपादकों के खिलाफ एफ आई आर की निंदा और अपील
विमर्श नहीं, विचारधारा : अस्मितावाद की जगह आंबेडकर-चिंतन
थेरीगाथा , बौद्ध धर्म और स्त्रियाँ
‘द वायस ऑफ़ हिन्द रजब’