गैंगस्टर माँ का साया और एक आज़ाद बेटी की परवाज़
परायों की गली में नितांत अकेला कुशवाहा सम्राट (चौधरी) !
प्रतीकों की लड़ाई: महिष दसरा, वर्चस्व का इतिहास और सत्ता का मौन
फिल्मों में स्त्री-भूमिका के प्रश्न “भूमिका” फ़िल्म के सन्दर्भ में
वहशी राष्ट्रवाद: अपने ही नागरिकों के खिलाफ जंग
देवयानी
पाकिस्तानी इस्लाम ने ली कंदील की जान
धर्मराष्ट्रवाद और राजनीति-खतरनाक गठजोड़ की नयी परंपरा
भारत माता जार-बेजार रो रही है
होली : एक मिथकीय अध्धयन
बहुजन सांस्कृतिक आगाज : महिषासुर शहादत दिवस
एक सांस्कृतिक आंदोलन के चार साल
ऐतिहासिक और अमिट है समाजवाद की वैचारिक धारा वरसी जी स्मृति समारोह में वक्ताओं की राय