आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
जब प्रलेस के बड़े लेखकों ने पाकिस्तानी महिलाओं से बदसुलूकी की
लेखिका ने गिनाये प्रगतिशील लेखक संघ के महिला विरोधी निर्णय: संघ सेक्सिस्ट पुलिसवाले के आगे नतमस्क
‘स्त्री’ : एक सार्थक हॉरर फिल्म
मिसोजिनी, नायकत्व और ‘कबीर सिंह’
एक युवा फिल्मकार की दस्तक: मंजिलें अभी शेष है!
मेरा एक सपना है ! (मार्टिन लूथर किंग का उद्बोधन,1963)
दिग्गज स्त्रीवादी समानांतर सिनेमा की एक बड़ी सख्सियत कल्पना लाजमी का निधन !
रंगमंच में हाशिये की सशक्त आवाज़ है ईश्वर शून्य का रंगकर्म
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर