कादम्बरी
फ्रीलांस पत्रकार.स्त्री मुद्दों पर केन्द्रित पत्रकारिता करती है. सम्पर्क : kadambari1992@gmail.com
पोर्नोग्राफ़ी यौन अंग या गतिविधि का एक चित्रण या प्रदर्शन है। यह कामोत्तेजना को प्रोत्साहित करता है। आम तौर पर, पोर्नोग्राफ़ी वयस्कों (18 वर्ष या उससे अधिक की उम्र के व्यक्ति) द्वारा, वयस्कों का उपयोग कर, और वयस्कों के उपभोग के लिए बनाई जाती है। लेकिन यह प्रवृत्ति बदल रही है। अब, पोर्नोग्राफ़ी के क्षेत्र में, न केवल वयस्क परन्तु अधिक से अधिक किशोर और बच्चे जबरदस्ती अथवा स्वेच्छा से लिप्त हो रहे हैं। भारत में, निजी तौर पर अश्लील सामग्री को डाउनलोड करना और देखना कानूनी है, लेकिन इसका उत्पादन या वितरण अवैध है।
लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम, 2012 (पोक्सो)
इस अधिनियम के तहत एक बच्चे का यौन उत्पीड़न, शोषण और पोर्नोग्राफ़ी बनाना दंडनीय अपराध हैं और इसमें कारावास का दंड अपराध के स्तर के आधार पर 3 साल से लेकर उम्रक़ैद तक हो सकता है। यह अधिनियम प्रत्येक प्रक्रम पर बच्चों के सर्वोत्तम हित और कल्याण को सुनिश्चित करता है।
एक बालक के यौन शोषण में निम्न व्यवहार और दृश्य शामिल हैं : किसी भी शब्द को बोलना या ध्वनि निकलना, किसी भी प्रकार का इशारा करना या शरीर के किसी भी वस्तु या भाग का प्रदर्शन करना जिससे कि एक बच्चे को उसके शरीर या उसके शरीर के किसी भाग को प्रदर्शित कराया जा सके, बच्चे के शरीर के किसी भी भाग की या किसी यौन कृत्य में बच्चे की भागीदारी को किसी भी रूप या मीडिया में पोर्नोग्राफ़िक के लिए ऑब्जेक्ट् बनाना, पोर्नोग्राफ़ी उद्देश्यों के लिए एक बच्चे को मोहित करना।
माता-पिता के लिए ज़रूरी है कि वह अपने बच्चों को सही और गलत स्पर्श तथा सही और गलत दृष्टि के बारे में बताएं। उन्हें इसके बारे में जागरूक करें और प्रोत्साहित करें कि वे अपने माता-पिता और अपने शिक्षकों पर भरोसा करें। तथा यदि कुछ गलत लगता है या गलत महसूस होता है तो उसे तत्काल अपने माता-पिता अथवा शिक्षकों को बताएं चाहे ग़लती करने वाला व्यक्ति कोई पारिवारिक सदस्य या मित्र से भी जानकारी दें। तथा उन्हें सिखाएं की वे डरें नहीं।
बाल पोर्नोग्राफी के प्रकार
1. सेक्स व्यापार उद्योग
2. स्व-रचित पोर्नोग्राफी
1. सेक्स व्यापार उद्योग : ये उद्योग डिजिटल मध्याम जैसे फ़ोटो, कार्टून, एनीमेशन, ध्वनि रिकॉर्डिंग(ऑडियो), एम,एम,इस, वीडियो गेम , ऑनलाइन अभिलेख, फ़िल्म, तथा प्रिंट मध्याम जैसे कॉमिक्स, कार्ड, पोस्टर, किताबें, पत्रिकाएं, चित्रकला के द्वारा बाल पोर्नोग्राफी का व्यापार करतीं हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के एक अध्ययन में पाया गया कि ये उद्योग पोर्नोग्राफी के लिए ज्यादा-से-ज्यादा किशोरों के इस्तेमाल कर रहे हैं।
बाल पोर्नोग्राफी का वर्तमान दृश्य बहुत ही भयानक और चिंताजनक है। 2007 में, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, भारत सरकार ने बाल शोषण पर एक अध्ययन किया था। इस अध्ययन के अनुसार, 12,446 बच्चों में से, 4.46% का नग्न फोटोग्राफ लिए गये। और इन बच्चों में 52.01% लड़के थे और 47.9 9% लड़कियां थीं।
बेडटाइम स्टोरीज : ‘ स्वीट ड्रीम्स’: सेक्स पोर्न और इरॉटिका का ‘साहित्य’ बाजार
2011 में गृह मंत्री राज्य मंत्री एम. रामचंद्रन ने लोकसभा में राज्यानुसार उन बच्चों का प्रतिशत बताया जिनकी नग्न फोटो ली गयी थी। देश भर में दर्ज मामलों की संख्या 2007, 2008, और 2009 में क्रमशः 99, 105 और 139 थी। महाराष्ट्र में आंकड़े क्रमश: 27, 17 और 25 थे। केरल में, आंकड़े इसी अवधि के लिए 20, 39 और 44 थे।
बेडटाइम स्टोरीज : ‘ स्वीट ड्रीम्स’: सेक्स पोर्न और इरॉटिका का ‘साहित्य’ बाजार -2
बच्चों के व्यवसायिक यौन शोषण (सीएसईसी)
किसी तृतीय पक्ष द्वारा नकदी या वस्तु के वित्तीय लाभ के लिए तस्करी, बिक्री और बाल विवाह जैसी व्यवस्थाएं बच्चों को यौन साथी के रूप में पेश करती हैं। आगरा-दिल्ली-जयपुर के त्रिभुज बेल्ट पर पारंपरिक मनोरंजन समूह में कई समुदाय शामिल हैं। इन समुदायों की लड़कियों अपनी देह व्यापर से परिवार का लालन-पालन करती हैं। ये समुदाय अपनी बेटियों को यौन मनोरंजन से कमाने के लिए प्रशिक्षित करते हैं और उन्हें यह विश्वास दिलाते हैं कि यही उनका एकमात्र व्यवसाय है।

2. स्व-रचित (बाल) पोर्नोग्राफी : बच्चों द्वारा स्व-निर्मित खुद का अश्लील चित्र। मुखर यौन चैट, सेक्सटिंग तथा खुद से या खुद की नग्न तस्वीरों का वयारल वितरण करना जिसे साइबर तांक-झांक कहते हैं, शामिल है।
नई तकनीक के आगमन और इंटरनेट की बढ़ती पहुंच के साथ-साथ जोखिम के कारकों में वृद्धि हुई है। दुर्व्यवहार करने वाले और पीडोफाइल इंटरनेट की ओर बढ़ रहे हैं। और वे बच्चों को मेनिप्यूलेट, प्रभावित और फुसला रहे हैं। यह प्रवृत्ति बहुत अधिक हानिकारक है क्योंकि बच्चों को उनकी इच्छा के खिलाफ मजबूर नहीं किया जाता है, बल्कि स्वेच्छा से भाग लेने के लिए ब्रेनवॉश किया जाता है। क्योंकि उनकी अपरिपक्वता के कारण वे अपने कर्मों के परिणामों को समझने में असमर्थ हैं और छल साधने इस का लाभ उठाते हैं। इंटरनेट उद्योग ने माता-पिता को कई फ़िल्टरिंग सिस्टम प्रदान किए हैं जैसे साइबर वॉच, नेट नेनी और साइबर नेनी आदि। लेकिन ये सिस्टम कोई भी वास्तविक समाधान को प्रदान नहीं करती हैं, बल्कि ये केवल शॉर्टकट हैं जो बड़ी समस्या को अनदेखा कर रहे हैं।
वे लाइव पोर्न में प्रदर्शन के पूर्व ईश्वर को प्रणाम करती हैं !
सेक्सटिंग:
सेक्सटिंग एक हाल ही में बढ़ती हुई प्रथा को दर्शाती है जिसमें लोग सेल फोन या कंप्यूटर और मैसेजिंग एप्लिकेशन का उपयोग करके स्वयं की नग्न या अर्द्ध-नग्न छवियों दूसरों को (जैसे मित्र या डेटिंग साथी) भेजते हैं। इसमें स्वयं खिंची फोटो, लिखित यौन संदेश, एमएमएस, वीडियो, ऑडियो आदि शामिल हैं।

लोग पोर्न क्यों देखते हैं? (पोर्नोग्राफी की खपत)
पोर्नोग्राफी कल्पनाओं (प्रकृति), श्रेणियों और क्रूरता से भरा हुआ है, पोर्नोग्राफी कल्पनाओं (प्रकृति), श्रेणियों और क्रूरता से भरा हुआ है जो देखने वाले के पशु पक्ष को प्रज्वलित करता है, और धीरे धीरे एक लत में बदल जाता है। पोर्न कई प्रकार की शैली, विधि और कल्पनाओं को दिखाती है और यह मानसिकता विकसित करती है कि पोर्न ही सबसे अच्छा तथा बहुत बढ़िया सेक्स है। यह खुद को व्यक्तिगत समस्याओं को हल करने वाले एक शिक्षक में बदलती है। यह हताशा से बचने के लिए यौन ऊर्जा को निकालने के लिए कहती है; किशोरावस्था में बच्चों को यौन शिक्षा सीखने का दावा करती है, जानकरी देने का दावा करती है जो यौन रिश्ते बनाने में क्या करना है और कैसे करना है।लेकिन दुर्भाग्यवश, इसमें कोई आत्मीयता और प्रेम शामिल नहीं होता है बल्कि यह निष्कपट, कल्पना-आधारित विषयों को प्रस्तुत करती है जो सेक्स को संदर्भ के बाहर कर देती है और दर्शकों के मनोरंजन के लिए फूहड़ता दिखती है।
लोग पोर्न क्यों बनाते हैं? (पोर्नोग्राफी का निर्माण)
बच्चों के बहुत कम उम्र में यौन सामग्रियों से अवगत होने के कारण वे कम उम्र में ही परिपक्व होते जा रहे हैं। इस कारण, बच्चों को अश्लील देखने की आदत के दुष्प्रभाव और नतीजे नहीं पता होते हैं, और कुछ समय बाद वे इसके आदी हो जाते हैं। बच्चे वयस्कों की नकल करते हैं, चाहे वे उनके माता-पिता हों, पड़ोसी हों, रिश्तेदार हों, फिल्म नायक-नायिका हों, या पोर्न अभिनेता हों। ठीक उसी तरह बच्चे बड़ो की कार्यों तथा उनके क्रियाओं की भी नकल करते हैं। नकल की शुरूआत होती है पोर्न देखने से होती है, फिर पोर्न का तथा उसकी क्रियाओं का अनुकरण होता है, और समय के साथ यह अधिक तीव्र होती जाती है। पोर्न का यह निर्विवाद शिक्षण बच्चों को असंवेदनशील बनाता है, और दुनिया व् समाज का ज्ञान न होने के कारण, वे शोषण करने वालों की चपेट में आ जाते हैं। एक समय के बाद बच्चों में पोर्नोग्राफ़ी की लत, उसकी नकल और असंवेदनशीलता उन्हें सरेआम कामुक व्यवहार करने के लिए प्रेरित करती है। इस वजह से, वे सामाजिक रूप से व्याकुल हो जाते हैं, कमजोर हो जाते हैं, आत्म नियंत्रण खो देते हैं और अलग महसूस करते हैं।

निष्कर्ष (वास्तविक समाधान):
बाल पोर्नोग्राफी दिन-प्रतिदिन बढती जा रही है। इस समस्या को इसकी जड़ों से बाहर निकालना ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है। हमें वास्तविक समस्या और कारणों पर ध्यान देने की जरूरत है जहां से यह सब शुरू होता है; और वह बचपन से है, एक व्यक्ति की परवरिश से है। माता-पिता को न केवल अपने बच्चों को उन पर विश्वास करने के लिए करना चाहिए हैं, बल्कि उनके साथ समय भी बिताना चाहिए। उन्हें अपनी किशोरावस्था की परेशानियों और चुनौतियों के बारे में बताएं, उन्हें उनके शारीरिक परिवर्तनों के बारे में सूचित करें और उन परिवर्तनों के बारे में सहज महसूस करायें। जब बच्चे अपने माता-पिता पर भरोसा करते हैं, सही और गलत के बीच का अंतर पहचानते हैं, तब उनमें आत्मविश्वास भर जाता है और वे अप्राकृतिक अभिलाषाओं से नहीं घिरते हैं ना ही पर्नोग्राफ़ी में लीन होते हैं, न किशोरावस्था में ना बढे होने के बाद। उनकी गलतियों में सहायता करना और उनके फैसले पर भरोसा करना इस बड़ी समस्या को हल कर सकता है और पोर्नोग्राफी को जड़ से उखाड़ सकता है।
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