वंदना वाजपेयी की कहानियाँ : नई संवेदनाओं की कथा-यात्रा
नारे, प्रतिरोध और मज़ा-मज़ाक
आधुनिक भारत में महिलाओं की भूमिका : परिवर्तन, उपलब्धियाँ और चुनौतियाँ
बाबू जगदेव प्रसाद की राजनीति: भाषा, प्रतीक और मुद्दे
पितृसत्ता से आगे जहाँ और भी है
स्त्री का समाज और समाज में स्त्री‘अकेली’
तो देख्यो है घूंघट पट खोल- मीराबाई : हिन्दी की पहली स्त्रीवादी : आख़िरी क़िस्त
‘तेरा कोई नहीं रोकणहारा, मगन होय मीरा चली’-मीराबाई : हिंदी की पहली स्त्रीवादी : तीसरी क़िस्त
अकेली कुहुक को जवाब मिले
माई मैं तो लियो है सांवरिया मोल’ — मीराबाई : हिंदी की पहली स्त्रीवादी : दूसरी क़िस्त
‘बरजी मैं काही की नाहिं रहूं’ — मीराबाई : हिंदी की पहली स्त्रीवादी : पहली क़िस्त
कठमुल्लों को चेतावनी संघियों को इशारा : हाथ तोड़कर अल्लाह के भरोसे छोड़ देंगी महिलाएं, यदि उनपर हाथ उठाया तो !
शिवम् अवस्थी की कविताएँ और ग़ज़ल