पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
लेखक संगठनों को समावेशी बनाने के सुझाव के साथ आगे आये लेखक: प्रलेस से की पहल की मांग
कश्मीर के आईने में शेष भारत का विकास और मर्दवादी चेहरा
वैवाहिक बलात्कार और हिंसा: एक अध्ययन
लेखिका ने गिनाये प्रगतिशील लेखक संघ के महिला विरोधी निर्णय: संघ सेक्सिस्ट पुलिसवाले के आगे नतमस्क
लेखक संगठन (प्रलेस) ने स्त्री अस्मिता पर मर्द दरोगा को दी तरजीह
मिसोजिनी, नायकत्व और ‘कबीर सिंह’
‘तिवाड़ी परिवार’ में जातिभेद और छुआछूत बचपन से देखा
ब्राह्मण होने का दंश: कथित पवित्रता की मकड़जाल
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब