दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
सावित्रीबाई फुले : शैक्षिक –सामाजिक क्रान्ति की अगुआ
स्त्रीवाद के भीतर दलित स्त्रीवाद
समकालीन नारीवाद और दलित स्त्री का प्रश्न
‘स्त्रीवाद मानव मुक्ति का आंदोलन है’
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना