रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सूखा नशा
फैंसी स्त्रीवादी आयोजनों में जाति मुद्दों की उपेक्षा
महिला मताधिकार के राजनीतिक संदेश
स्त्री-सत्ता : यथार्थ या विभ्रम
मनुवादी न्याय का शीर्ष तंत्र
दिमाग पर निष्क्रिय होने की चोट उसे निष्क्रिय बनाकर ही छोड्ती है
पितृसत्तात्मक समाज का शिकार पुरुष तथा स्त्रीवादी मुक्ति अभियान
डॉ. अम्बेडकर का मूल चिंतन है स्त्री चिंतन
न्यायपालिका में मौजूद जातिवादी मानसिकता – अरविंद जैन
नाच एक संवेदनशील उपन्यास