दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन
“श्वेत पर्दे पर श्याम और उनकी ‘सुसमन ’ (The Essence)
पोस्ट ट्रुथ के दौर में युवाओं (जेन Z) के आंदोलन : कुछ सवाल, कुछ जवाब
सतीश सरदाना का कहानी-संग्रह ‘चोखा दाम’ मनुष्य, बाज़ार और स्मृति
ऊप्स मूमेंट : स्त्री को देह बनाते कैमरे
विमर्श से परे: स्त्री और पुरुष-पहली किश्त
हम चार दशक पीछे चले गए हैं :
स्त्री विमर्श की पठनीय किताबें
जीना जिन्दगी को आत्मकथा के नजरिये से -अंतिम किश्त
‘सावित्री बाई फुले वैचारिकी सम्मान’
स्त्री-विरोधी लेखन दलित लेखन नहीं हो सकता
यौनिकता की विश्वसनीय दृश्यता: भाग 3
‘प्रगतिशील सिनेमा’ प्रेमचंद का अधूरा सपना