लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
स्त्री लेखन का स्त्रीवादी पाठ
कांशीराम से मायावती तक: दलित राजनीति और दलित स्त्री-प्रश्न
सामंती हवेलियों में दफ्न होती स्त्री
मुस्लिम महिलाओं की निर्णय स्वतंत्रता: प्रतिरोध का एक स्वरूप
अस्तित्व के प्रश्न खड़े करती दलित स्त्री पात्र
स्त्री कामुकता का उत्सव मानती फ़िल्म ‘मार्गरीटा विद अ स्ट्रॉ’
स्त्री विमर्श और ‘कठगुलाब’
स्त्रीवाद और महादेवी की ‘श्रृंखला’ की कड़ियाँ’
सूखा नशा