लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
महिला पत्रकारों पर बढ़ रहे हमले, जेएनयू प्रदर्शन के दौरान भी पुलिस की बदसुलूकी
मर्दोत्सव और स्त्रीविलाप बीच होलिका का लोकमिथ
इस्लाम में हराम परिवार-नियोजन: एक मिथक
‘विजय संकेत’ के रूप में स्त्री शरीर
‘राष्ट्रवादी’ इतिहासकार काशी प्रसाद जायसवाल: एक स्त्रीवादी अवलोकन
राष्ट्रीय आंदोलन में महिलायें और गांधीजी की भूमिका पर सवाल
भारतीय उपमहाद्वीप का स्त्री लेखन: स्त्री सशक्तीकरण की अनुगूंजें
वेश्यावृत्ति का समुदायिकरण और उसका परंपरा बनना
सूखा नशा