लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
क्रूर और हिंसक यथार्थ में प्रेम और करुणा को बचाये रखने की कोशिश है समकालीन स्त्री- कविता
भिखारी ठाकुर की तुलना शेक्सपियर से करना भिखारी ठाकुर का अपमान है
‘यौन हिंसा के सन्दर्भ में लज्जित करने की रणनीति’ (यशपाल के झूठा-सच में)
हिंदी साहित्य में आदिवासी महिलाओं का योगदान
काश ! ऐसी पत्नियाँ, बहनें समाज का अधिकतम सच हो जायें!
सुप्रीम कोर्ट का दहेज़ संबंधी निर्णय यथार्थ की जमीन पर
माहवारी में थोपे गये पापों से मुक्ति हेतु कब तक करते रहेंगी ऋषि पंचमी जैसा व्रत!
बलात्कारी परिवेश में रक्षाबंधन पर एक बहन का नोट्स:
सूखा नशा