लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
जुंको फुरुता: जिसे याद रखना ही होगा
मासिक धर्म : आखिर चुप्पी कब तक ?
राजनीति की स्त्रीविरोधी वर्णमाला
चाइल्ड केयर लीव बनाम मातृत्व की ठेकेदारी पर ठप्पा
पितृसत्ता पुरुषों का अमानवीयकरण करती है : कमला भसीन
औरत , विज्ञापन और बाजार
रक्तरंजित कहानी महिला प्रतिनिधित्व की
बहन के नाम राजनीतिक पत्र
सूखा नशा