आजादी के आंदोलन में आम लोगों की हिस्सेदारी रेखांकित करना: नाटक
आवाज़
‘सोनिया और राजीव’ ‘मेलोनी और मोदी’
सांस्कृतिक राष्ट्रवाद नहीं, लोकतान्त्रिक राष्ट्रवाद को मजबूत करने की जरूरत है: अनिता भारती
मासिक धर्म : आखिर चुप्पी कब तक ?
राजनीति की स्त्रीविरोधी वर्णमाला
चाइल्ड केयर लीव बनाम मातृत्व की ठेकेदारी पर ठप्पा
पितृसत्ता पुरुषों का अमानवीयकरण करती है : कमला भसीन
औरत , विज्ञापन और बाजार
रक्तरंजित कहानी महिला प्रतिनिधित्व की
बहन के नाम राजनीतिक पत्र
प्यार पर न चढाओ हैवानियत की चादर
स्त्री भागीदारी पर एक दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी: उपलब्धियों के साथ नई चुनौतियों पर जोर