फ़िलिस्तीन : एक नया कर्बला – नासिरा शर्मा
पूर्ण लोकतंत्र की स्थापना : एक किताब,एक पहल
बच्चों की क़त्लगाह ग़ाज़ा पट्टी
सुनो पुरुष: असुंदर और वेश्यायें भी लेखिका हो सकती हैं, कवि, आलोचक और निर्णायक भी
बलात्कार को सिर्फ परिचर्चा का विषय नहीं बनायें
‘दर्दजा‘: हव्वा को पता होता तो वह बेऔलाद रह जाती
पांच रूपये और पांच मिनट का क्रूर फेयर और लवली व्यापार
दलित महिलाओं को मंदिर प्रवेश से रोका: महिलाओं ने की शिकायत
क्या केजरीवाल लेंगे ऐक्शन: साहित्य कला परिषद के उपसचिव द्वारा पत्नी से मारपीट का मामला थाने पहुंचा
देश में रेप कल्चर- एक हकीकत
उन दिनों मम्मी की जगह बुआ या चाची खाना देती थी
दोहरी सियासत का शिकार फ़िलिस्तीन