लोक से विश्व तक गूंजती छत्तीसगढ़ की धड़कन अब खामोश: तीजन बाई
रीतिकालीन कविता और स्त्री यौनिकता विमर्श
हँसना है तो थोड़ा रो लें: मैं वापस आऊंगा’
“भक्तिकालीन हिंदी साहित्य में स्त्री-अस्मिता कीअभिव्यक्ति : एक आलोचनात्मक अध्ययन”
सुनो पुरुष: असुंदर और वेश्यायें भी लेखिका हो सकती हैं, कवि, आलोचक और निर्णायक भी
बलात्कार को सिर्फ परिचर्चा का विषय नहीं बनायें
‘दर्दजा‘: हव्वा को पता होता तो वह बेऔलाद रह जाती
पांच रूपये और पांच मिनट का क्रूर फेयर और लवली व्यापार
दलित महिलाओं को मंदिर प्रवेश से रोका: महिलाओं ने की शिकायत
क्या केजरीवाल लेंगे ऐक्शन: साहित्य कला परिषद के उपसचिव द्वारा पत्नी से मारपीट का मामला थाने पहुंचा
देश में रेप कल्चर- एक हकीकत
उन दिनों मम्मी की जगह बुआ या चाची खाना देती थी
सूखा नशा